उत्तर प्रदेश शासन
वित्त विभाग
(नियमावली एवं विधि प्रकोष्‍ठ)
संख्‍या-14/2016/वे0आ0-2-261/दस-2016
लखनऊ: दिनांक : 29 फरवरी, 2016
अधिसूचना
प्रकीर्ण

संविधान के अनुच्‍छेद 309 के परन्‍तुक द्वारा प्रदत्त शक्‍ति का प्रयोग करके राज्‍यपाल उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग आशुलिपिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2014 में संशोधन करने की दृष्‍टि से निम्‍नलिखित नियमावली बनाते हैं:--

उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग आशुलिपिक संवर्ग सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2016


संक्षि‍प्‍त नाम और प्रारम्‍भ
1. (1) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग आशुलिपिक संवर्ग सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2016 कही जायेगी।
    (2) यह तुरन्‍त प्रवृत्त होगी।
नियम 5 का संशोधन 2.   उत्तर प्रदेश सरकारी विभाग आशुलिपिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2014 जिसे आगे उक्‍त नियमावली कहा गया है, में नियम 5में विद्धमान खन्‍ड(ग), के पश्‍चात्निम्‍नलिखित नया खन्‍ड (ग-1) बढ़ा दिया जायेगा, अर्थातः-
      ''(ग-1) 'आयोग' का तात्‍पर्य उत्तर प्रदेश अधीनस्‍थ सेवा चयन आयोग से है''
नियम 7 का प्रतिस्‍थापन
        3. उक्‍त नियमावली में, नीचे स्‍तम्‍भ-1 में दिये गये विद्धमान नियम 7 के स्‍थान पर स्‍तम्‍भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात: - 
स्‍तम्‍भ-1 स्‍तम्‍भ-2
विद्धमान नियम एतदद्वारा प्रतिस्‍थापित नियम
भर्ती का स्रोत 7. सेवा में विभि‍न्‍न  श्रेणियों के पदों  पर भर्ती  निम्‍नलिखित स्रोतों से की   जायेगीः- भर्ती का स्रोत 7. सेवा में विभि‍न्‍न    श्रेणियों के पदों   पर भर्ती   निम्‍नलिखित स्रोतों  से की   जायेगीः-    
  (1) आशुलिपिक  संवर्ग आयोग के माध्‍यम से  सीधी भर्ती द्वारा।   (1) आशुलिपिक संवर्ग आयोग के माध्‍यम से  सीधी भर्ती द्वारा।
  (2) वैयक्‍तक सहायक श्रेणी-2 मौलिक रूप से नियुक्‍त  आशुलिपिकों में से, जिन्‍होंने भर्ती के वर्ष के प्रथम दिवस को इस रूप में आठ वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली हो,चयन समिति के माध्‍यम से पदोन्‍नित द्वारा।   (2) वैयक्‍तक सहायक  श्रेणी-2 मौलिक रूप से नियुक्‍त  आशुलिपिकों में से,जिन्‍होंने भर्ती के वर्ष के प्रथम दिवस को इस रूप में आठ वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली हो,चयन समिति के माध्‍यम से  पदोन्‍नित द्वारा।  
  (3) वैयक्‍ति‍क  सहायक श्रेणी-1 मौलिक रूप से नियुक्‍त वैयक्‍ति‍क सहायक श्रेणी-2 में से,जिन्‍होंने  भर्ती के वर्ष के प्रथम दिवस को आशुलिपिक  संवर्ग के कुल पन्‍द्रह वर्ष की सेवा और  वैयक्‍ति‍क सहायक श्रेणी-2 के पद पर पॉच वर्षों की मौलिक सेवा पूर्ण कर ली हो, चयन समिति के माध्‍यम से पदोन्‍नति द्वारा।     (3) वैयक्‍ति‍क  सहायक श्रेणी-1 मौलिक रूप से नियुक्‍त वैयक्‍ति‍क सहायक श्रेणी-2 में से,जिन्‍होंने भर्ती के वर्ष के प्रथम दिवस को आशुलिपिक संवर्ग में कुल  पन्‍द्रह वर्ष की सेवा और वैयक्‍ति‍क सहायक श्रेणी- 2 के पद पर पॉच वर्षों की मौलिक सेवा पूर्ण कर ली हो, चयन समिति के माध्‍यम से पदोन्‍नति द्वाराः परन्‍तु यह कि यदि पदोन्‍नति हेतु पात्र व्‍यक्‍त  उपलब्‍ध नहीं है, तो नियुक्‍त  प्राधिकारी अपने से एक स्‍तर उच्‍चतर अधिकारी के अनुमोदन से पोषक पद पर पॉच वर्ष की मौलिक सेवा की शर्त से अभि‍मुक्‍त कर सकता है और वैयक्‍ति‍क सहायक श्रेणी-1 के पद पर पदोन्‍नित,मौलिक रूप से नियुक्‍त ऐसे वैयक्‍ति‍क सहायक श्रेणी-2 में से, जिन्‍होंने भर्ती के वर्ष के प्रथम दिवस को आशुलिपिक संवर्ग में न्‍यूनतम पन्‍द्रह वर्षों कीसेवा पूर्ण कर ली हो, कर सकता है।
नियम 16 का प्रतिस्‍थापन
4. उक्‍त नियमावली में, नीचे स्‍तम्‍भ-1 में दिये गये विƭमान नियम 16 के स्‍थान पर स्‍तम्‍भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थातः-
स्‍तम्‍भ-1 स्‍तम्‍भ-2
विद्धमान नियम एतदद्वारा प्रतिस्‍थापित नियम
रिक्‍ति‍यों का अवधारण 16- नियुक्‍ति प्राधिकारी भर्ती के वर्ष के दौरान भरी जाने वाली रिक्‍ति‍यों की संख्‍या के साथ-साथ नियम-8 के अधीन अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्‍य श्रेणियों के अभ्‍यर्थियों के लिए आरक्षि‍त की जाने वाली रिक्‍ति‍यों की संख्‍या भी अवधारित करेगा। सीधी भर्ती द्वारा भरी जाने वाली रिक्‍ति‍यॉ निम्‍नानुसार अधिसूचित की जायेंगी:--
(1) व्‍यापक प्रसार वाले दैनिक समाचार-पत्र में विज्ञापन जारी करके।
(2) कार्यालय के सूचना पट पर सूचना चिपका
करके या रेडियो / दूरदर्शन और अन्‍य रोजगार समाचार-पत्रों के माध्‍यम से विज्ञापन के द्वारा।
(3) सेवायोजन कार्यालय को रिक्‍तयां अधिसूचित करके।
रिक्‍ति‍यों का अवधारण 16- नियुक्‍ति प्राधिकारी भर्ती के वर्ष के दौरान भरी जाने वाली रिक्‍ति‍यों की संख्‍या के साथ-साथ नियम-8 के अधीन अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्‍य श्रेणियों के अभ्‍यर्थियों के लिए आरक्षि‍त की जाने वाली रिक्‍ति‍यों की संख्‍या भी अवधारित करेगा। सीधी भर्ती द्वारा भरी जाने वाली रिक्‍ति‍यॉ, आयोग को सूचित की जायेंगी।
नियम 17 का प्रतिस्‍थापन
5. उक्‍त नियमावली में, नीचे स्‍तम्‍भ-1 में दिये गये विद्धमान नियम 17 के पर स्‍तम्‍भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा,    अर्थातः -

स्‍तम्‍भ-1
स्‍तम्‍भ-2
विद्धमान नियम एतदद्वारा प्रतिस्‍थापित नियम
आशुलिपिक के पद हेतु सीधी भर्ती की प्रक्रि‍या   17-  सेवा में आशुलिपिक के पद पर  सीधी भर्ती समय-समय पर यथासंशोधित उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के क्षेत्र के बाहर) के समूह 'ग' के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रि‍या नियमावली, 2002 के अनुसरण में की जायेगी। आयोग के माध्‍यम से  आशुलिपिक के पद हेतु  सीधी भर्ती की प्रक्रि‍या 17-  सेवा में आशुलिपिक के पद पर  सीधी भर्ती समय-समय पर यथासंशोधित उत्तर प्रदेश समूह 'ग' के पदों पर सीधी भर्ती (रीति और प्रक्रि‍या) नियमावली, 2015 के अनुसार की जायेगी।
नियम 20 का प्रतिस्‍थापन
6. उक्‍त नियमावली में, नीचे स्‍तम्‍भ-1 में दिए गये विद्धमान नियम 20 के स्‍थान पर स्‍तम्‍भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थातः-

स्‍तम्‍भ-1
स्‍तम्‍भ-2
विद्धमान नियम एतदद्वारा प्रतिस्‍थापित नियम
परिवीक्षा 20-(1)  सेवा में किसी पद पर मौलिक रूप से  नियुक्‍त किये जाने पर व्‍यक्‍त को दो वर्ष की  अवधि‍ के लिए परिवीक्षा पर रखा  जायेगा।   परिवीक्षा 20-(1) सेवा में किसी पद पर मौलिक रूप से  नियुक्‍त किये जाने पर किसी व्‍यक्‍त को समय-समय पर यथासंशोधित  उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक परिवीक्षा  नियमावली, 2013 के अनुसार परिवीक्षा पर रखा जायेगा।
  (2)   नियुक्‍त प्राधिकारी ऐसे कारणों से, जो  अभिलि‍खित किये जायेंगे, अलग-अलग  मामलों में परिवीक्षा अवधि‍ को बढ़ा सकता  है, जिसमें ऐसा दिनांक विनिर्दिष्‍ट किया जायेगा जब तक अवधि‍ बढ़ायी जाय।     (2) यदि परिवीक्षा अविध या बढ़ायी गयी परिवीक्षा अवधि‍ के दौरान किसी भी समय या उसके अन्‍त में नियुक्‍त प्राधिकारी को यह प्रतीत हो कि  परिवीक्षाधीन व्‍यक्‍त ने अपने अवसरों का  पर्याप्‍त उपयोग नहीं किया है या सन्‍तोष  प्रदान करने में अन्‍यथा विफल रहा है तो उसके मौलिक पद पर यदि कोई हो, प्रत्‍याविर्तत किया जा सकता है और  यदि उसका किसी पद पर धारणाधिकार न हो तो उसकी सेवायें समाप्‍त की जा सकती हैं।
    परन्‍तु यह कि आपवादिक परिस्‍थिति‍यों के सिवाय परिवीक्षा अविध एक वर्ष से अधिक और किसी भी परिस्‍थिति‍ में दो वर्ष से अधिक नहीं बढ़ायी जायेगी।      
  (3) यदि परिवीक्षा अवधि या बढ़ायी गयी  परिवीक्षा अवधि के दौरान किसी भी समय या उसके अन्‍त में नियुक्‍त प्राधिकारी को यह प्रतीत हो कि परिवीक्षाधीन व्‍यक्‍त ने अपने अवसरों का पर्याप्‍त उपयोग नहीं किया है या सन्‍तोष प्रदान करने में अन्‍यथा विफल रहा है तो उसके मौलिक पद पर यदि कोई हो, प्रत्‍याविर्तत किया जा सकता है और यदि उसका किसी पद पर धारणाधिकार न हो तो उसकी सेवायें समाप्‍त की जा सकती हैं।   (3) ऐसा परिवीक्षाधीन व्‍यक्‍त, जिसे उप नियम (2) के अधीन प्रत्‍याविर्तत किया जाय या जिसकी सेवायें समाप्‍त कीजाय किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा।  
  (4) ऐसा परिवीक्षाधीन व्‍यक्‍त, जिसे उप नियम (3) के अधीन प्रत्‍याविर्तत किया जाय या जिसकी सेवायें समाप्‍त की जाय किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा।   (4) नियुक्‍त प्राधिकारी सेवा के संवर्ग में सम्‍मिलत किसी पद पर या किसी अन्‍य समकक्ष या उच्‍चतर पद पर स्‍थानापन्‍न या अस्‍थायी रूप से की गयी निरन्‍तर सेवा को परिवीक्षा अवधि‍ की संगणना करने के प्रयोजनार्थ गिने जाने की अनुमति‍ दे सकता है।
  (5) नियुक्‍त प्राधिकारी सेवा के संवर्ग में सम्‍मिलत किसी पद पर या किसी अन्‍य समकक्ष या उच्‍चतर पद पर स्‍थानापन्‍न या अस्‍थायी रूप से की गयी निरन्‍तर सेवा को परिवीक्षा अविध की  संगणना करने के प्रयोजनार्थ गिने जाने की अनुमित दे सकता है।      
आज्ञा से,
अजय अग्रवाल, सचिव।